देसी विलेज ममी की गांड और छूट छाती साड़ी में घुस के

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कबीर अपनी ममी का आशिक़ हे और उसकी ममी अपने इस भांजे के लुंड की दीवानी. आज कबीर को सुबह सुबह ही चांस मिल गया ममी के साथ मस्ती मरने का. ममी की साड़ी उठा के अंदर घुस गया ये हरामी. ममी हैट हैट करती रही लेकिन उसने गांड के होल पर जीभ दाल के चेतना चालू कर दिया. अभी तो मॉर्निंग का हगने भी नहीं गई थी ममी और उसकी गांड को ये अलग ही अनुभव करवा दिया. अब कबीर के ऐसे चाटने से ममी के अंदर की औरत तो जगनि ही थी. वो भी माथा पकड़ के अपनी छूट और गांड के ऊपर घिसने लगी. और बोली चाट और जोर जोर से साले और चाट के साफ कर दे.